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अभय मल्होत्रा

मुंबई एयरपोर्ट के एक प्राइवेट हैंगर में एक जेट आकर रुकती है। जेट का दरवाजा खुलता है, और एक आदमी, जिसकी उम्र पचास के आसपास होगी, और उसकी जवान बेटी बाहर निकलने को होते हैं। तभी, एक और आदमी वहां आ जाता है। उसके चेहरे पर एक ठंडी मुस्कान है और उसके हाथ में एक गन। वह गन को लड़की की तरफ तानता है और धीरे-धीरे अंदर की तरफ बढ़ने लगता है। अंदर जाते ही वह एक सीट पर बैठ जाता है। उसके साथ उसके दो-तीन बॉडीगार्ड्स भी हैं।

वह आदमी गुस्से में उसे घूरता हुआ उसके पास बढ़ने लगता है, लेकिन तभी उस नए आदमी ने उसकी टांग पर गोली चला दी। गोली लगते ही वह आदमी जमीन पर गिर पड़ा, और उसकी बेटी की चीख निकल गई। वह आदमी मुस्कुराता हुआ लड़की के पास बढ़ा और फिर अपनी गन से उसके पिता के सिर पर वार करता है। हालांकि, उसने गोली नहीं चलाई थी; सिर्फ गन से मारा था, लेकिन सिर से खून बहने लगा। बेटी जोर-जोर से रोने और सिसकने लगी, लेकिन हिम्मत नहीं कर पाई कि आगे बढ़ सके। वह वहीं खड़ी थी, कांपते हुए।

सामने उसका पिता अधमरी हालत में था, सिर और शरीर से खून बह रहा था। वह हाथ-पैर जोड़कर गिड़गिड़ाने लगा, "प्लीज, अभय सर, ऐसा मत कीजिए। अगर मैंने ऐसा किया, तो अखंड सर मुझे जान से मार देंगे। मैं ये डील नहीं कर सकता, न ही इन पेपर्स पर साइन कर सकता हूं।"

उसका नाम अभय था। वह अपनी काली-नीली आंखों से गुस्से में देखते हुए बोला, "तुझे इस वक्त भी उस अखंड की परवाह है? तुझे डर नहीं कि अगर तूने साइन नहीं किया तो मैं तेरे साथ क्या कर सकता हूं? अगर तूने अभी साइन नहीं किया, तो मैं तेरी जान ले लूंगा।"

वह आदमी सर झुकाकर गिड़गिड़ाता हुआ बोला, "सर, मरना तो दोनों ही तरफ से है। अगर मैं आपकी बात नहीं मानूंगा, तो आप मार देंगे, और अगर उनकी बात नहीं मानी, तो वो मार देंगे।" उसकी बात सुनकर अभय हंसने लगा और अपनी काली-नीली आंखों से घूरते हुए बोला, "बहुत समझदार है तू। चल, साइन कर दे जल्दी से। मैं तुझसे वादा करता हूं, तुझे उसके हाथों मरने नहीं दूंगा।" 

फिर भी वह आदमी अपनी बात पर अड़ा रहा और फाइल पर साइन नहीं कर रहा था। अभय उसे शैतानी मुस्कान के साथ देखकर बोला, "रस्सी जल गई, पर बल नहीं गया। खैर, छोड़, मैं तुझे साइन करने के लिए नहीं कहूंगा। जब मर्जी हो, तब कर देना। वरना मत करना।"

इतना कहकर उसने सामने रखी वाइन की बोतल से एक गिलास में वाइन भरी और एक घूंट लिया। फिर उसने दूसरा घूंट लेने के लिए गिलास उठाया, लेकिन बीच में रुककर बोला, "इस तरह से पीने का मजा नहीं आ रहा है। पीने का असली मजा तो तब आए जब कोई पिलाने वाली आ जाए।"

इतना कहकर उसने अपने एक आदमी की तरफ इशारा किया। वह आदमी सिर झुकाकर गया और उस लड़की को घसीटते हुए अभय के पास ले आया। लड़की खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी, रो रही थी। अभय ने एक झटके में लड़की को पकड़कर अपनी गोद में बिठा लिया। यह देखकर लड़की का पिता डर से कांपते हुए खड़ा होकर अभय के करीब आ गया और रोते हुए बोला, "अभय सर, आप जो कहेंगे, मैं करूंगा। आपको इन पेपर्स पर साइन चाहिए, तो मैं अभी कर दूंगा।"

वह फाइल उठा लेता है, लेकिन उसके पास पेन नहीं था। अभय लड़की को कस के पकड़े हुए था। वह रो रही थी और खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन अभय ने उसके दोनों हाथ मजबूती से पकड़ रखे थे। वह उसके गले पर वाइन गिराकर अपनी जीभ से चाटने लगा। लड़की रोए जा रही थी, पर अभय को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। लड़की का बाप रोते हुए हाथ जोड़कर बोला, "प्लीज, मेरी बेटी को छोड़ दीजिए। आप जो कह रहे हैं, मैं करने को तैयार हूं। मेरी बेटी की जिंदगी बर्बाद मत कीजिए।"

अभय उसकी बात सुनकर उसके पेट में जोर से लात मारता है। वह आदमी दर्द से दो कदम पीछे चला गया और सीधा जमीन पर गिर गया। अभय मुस्कुराते हुए बोला, "अब मुझे इस फाइल पर साइन नहीं चाहिए। तेरी बेटी के साथ वाइन पीने का मजा ही कुछ और है। नशा और भी ज्यादा हो रहा है। सोच, बिस्तर पर कितनी अच्छी होगी।"

यह सुनते ही दोनों बाप-बेटी फूट-फूट कर रोने लगे। तभी अभय उसे देखते हुए बोला, "मुझे बुरा लग रहा है तुझे ऐसे रोते हुए देखकर। जब तक मैं यह वाइन खत्म करता हूं, तब तक तू पेन ढूंढ ले और इस फाइल पर साइन कर दे। अगर साइन हो गई, तो तेरी बेटी को छोड़ दूंगा।"

इतना कहकर वह फिर से उसके गले पर वाइन गिराने लगा और चाटने लगा। वह लड़की और ज्यादा चीखने लगी और खुद को छुड़ाने की कोशिश करने लगी। उसका बाप लड़खड़ाते हुए इधर-उधर पेन ढूंढने लगा। उसे पेन नहीं मिल रहा था, लेकिन उसे अपने दर्द से ज्यादा अपनी बेटी की परवाह थी। वह वहां खड़े सभी आदमियों के पास जाता है, पर सब हंस रहे थे। वह पेन मांगता रहा, लेकिन किसी ने पेन नहीं दिया। वहीं, अभय लड़की के क्लिवेज पर अपनी जीभ से लिक करने लगा। तभी एक आदमी के पास पेन दिखता है।

वह आदमी पेन लेकर लड़खड़ाते हुए अभय के पास पहुंचा और टेबल पर रखे हुए फाइल पर साइन करने लगा। लेकिन पेन चल नहीं रही थी, जिसकी वजह से वह पेपर पर साइन नहीं कर पा रहा था। वह बार-बार पेन को हिला रहा था कि वह चल जाए। अभय उसकी हालत देखकर मुस्कुराने लगा और वाइन की बोतल उठाकर लड़की के सिर पर उलट देता है, जिससे वाइन उसके पूरे शरीर पर गिर जाती है। वहां खड़े सारे लोग उसे अजीब नजरों से देख रहे थे। लड़की बेबस होकर बस रोए जा रही थी।

अभय ने एक नजर लड़की को देखा और फिर उसके होंठों की तरफ बढ़ने लगा। तभी उस आदमी ने साइन किए हुए पेपर उसकी तरफ बढ़ा दिए और हाथ जोड़ते हुए बोला, "यह लीजिए आपकी फाइल और मेरी बेटी को छोड़ दीजिए। मैंने जो कहा, वह कर दिया।" इतना कहकर वह उसके पैरों पर गिर पड़ा। अभय फाइल लेकर मुस्कुराया और उस आदमी को देखकर बोला, "तुमने अपना वादा पूरा किया। अब मैं अपना वादा पूरा करूंगा। मैं तुझे अखंड के हाथों नहीं मरने दूंगा।"

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इतना कहकर उसने अपने आदमी को देखा, जिसने उसे गन थमाई। अभय ने गन ली और उस आदमी के सिर के आर-पार गोली चला दी। यह देखकर लड़की की चीख निकल गई। वह अपने पापा के पास भागी, लेकिन अभय ने उसके बाल पकड़कर उसे अपने पास खींच लिया। वह अभय की शर्ट पकड़कर जोर-जोर से रोने लगी।

अभय उसके बालों को सहलाते हुए बोला, "तुम अपने मरे हुए बाप के लिए इतना क्यों रो रही हो? वैसे भी उसे डर था कि अखंड के हाथों मरेगा, तो मैंने ही उसे मार दिया। चाहे मेरे हाथों, चाहे उसके हाथों, मरना तो उसे था ही। वैसे, तुम रो मत बेबी। तुम्हारे बाप के जाने के बाद, मैं और मेरे आदमी तुम्हें अकेला महसूस नहीं होने देंगे। कुछ दिन मेरे साथ इंजॉय कर लेना, उसके बाद मेरे आदमी तुम्हारे साथ इंजॉय करेंगे।"

यह सुनकर वहां खड़े अभय के आदमी हंसने लगे। लड़की घिन भरी निगाहों से अभय को देख रही थी और रो रही थी। अभय ने पहले फाइल को अपने हाथ में लिया और फिर लड़की को अपने कंधे पर उठाकर जाने को हुआ। तभी उसके कानों में एक आवाज गूंजती है, "इतनी जल्दी मूवी खत्म हो गई? अभी तो मैंने ट्रेलर भी नहीं देखा। जहां तुम रहते हो, वहां हर चीज जल्दी खत्म हो जाती है। एंटरटेनमेंट तो अब शुरू होगी, क्योंकि अब मैं आ गया हूं।"

इस आवाज को सुनकर अभय गुस्से में कांपने लगा, क्योंकि वह जानता था कि यह आवाज अखंड की है। अखंड इस वक्त सिर्फ ब्लैक शर्ट और ब्लैक लोअर में था। अखंड को देखकर अभय ने लड़की को नीचे उतार दिया और हाथ में लिए फाइल को एक नजर देखते हुए बोला, "इस बार तू पीछे रह गया यह डील पूरी तरह से मेरी हो गई है, और उस आदमी को मैंने ही ठिकाने लगा दिया। तेरे हाथ कुछ नहीं आया। वैसे जीत की खुशी में, मैं तुझे ये लड़की दे सकता हूँ,” अभय ने अहंकार से कहा।

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Js Singh

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